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Lal Salam — Journey of India Iron and Steel Company

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देश चलता है मेहनत से, कर्म से, पुरुषार्थ से। तभी तो मिट्टी से उपज, लौह पत्थर से इस्पात, तकनीकी से उन्नति, आदी से देश का विकास, निर्माण और भविष्य तय होता है जिसका असर प्रत्येक व्यक्ति के जीवनशैली पर होता है और वो भी निरन्तर तथा दूरगामी होती है।
लौह इस्पात उद्योग को किसी देश के अर्थिक विकास की धुरी माना जाता है।
विकास की दृष्टि से देखा जाय तो सबसे पहला कारख़ाना सन् 1874 में कुल्टी नामक स्थान पर ‘बाराकर लौह कम्पनी’ के नाम से स्थापित किया गया था। जो 1889 में बंगाल लोहा एवं इस्पात कम्पनी के रूप में परिवर्तित हो गया।1908 में पश्चिम बंगाल की दामोदर नदी घाटी में हीरापुर नामक स्थान पर भारतीय लौह इस्पात कम्पनी स्थापित हुई।1923 में दक्षिण भारत के मैसूर राज्य के भद्रवती नामक स्थान पर भारत की प्रथम सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई ‘मैसूर आयरन एण्ड स्टील वक्र्स’ की स्थापना की गई, जिसको वर्तमान में ‘विश्वेश्वरैया आयरन एण्ड स्टील कं. लि.’ के नाम से जाना जाता है।
1937 में बर्नपुर में ‘स्टील कार्पोरेशन ऑफ़ बंगाल’ की स्थाप

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