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” बेटी एक वरदान दहेज़ दे कर मत करो अपमान, बेटियों को सम्मान दें दहेज़ लेना छोड़ दें “

kyuquality

तो कहानी शुरू होती है छठ से क्युकी छठ में मैं घर गया था और लगभग मेरे ही जैसे बहुत सारे बिहारी जो अपना घर छोड़ कर नौकरी के लिए बाहर रहते हैं उनको साल में एक दो बार यही मौका मिलता है जब पुरे परिवार के साथ रहें और पर्व त्यौहार मनाएं।

भैया ने कहाँ की दीप्ती की शादी के लिए एक लड़का पता कियें हैं छठ के दूसरे दिन देखने जाना है तुम भी यहाँ हो इस बार तो हम सब लोग चल के देख सुन लिया जाए लड़का सरकारी बैंक में काम करता है मुंबई में। तुम लोग बात चीत कर के ठीक से समझ लोगे की कैसी नौकरी है और बात व्यवहार में कैसा है लड़का मुंबई में रहता है और तुम्हारा आना जाना लगा रहता है तो तुम मिल भी लोगे और लड़का पसंद आ गया तो मुंबई जा कर उस की नौकरी के बारे में पता भी कर लेना।

हम सब को सही हम सभी ने आपस में बात की लड़का सही है एक बार जा कर देखा जा सकता है और ये ऐसा समय था जब मेरी शादी की तैयारी हो रही थी

सब को लगा की मेरी शादी के कुछ महीने बाद दीप्ती की शादी कर देंगे।

दीप्ती पढ़ने में बहुत तेज़ हैं वो सरकारी नौकरी की तैयारी करती रहती है अगर भतीजो के मुकाबले देखें तो भतीजी मेरी काफी तेज़ हैं पढ़ने में।

भैया ने लड़के के मामा को फ़ोन लगाया और मिलने का समय चार बजे फिक्स हुआ, जाने वाले में मैं पापा भैया छोटा भाई और मेरा भतीजा था हम सब तैयार हो के पहुंच गएँ लड़के वाले के घर, उनका घर मेरे घर से लगभग दस किलोमीटर दुरी पर था । लड़के के पिता जी स्वास्थ विभाग से रिटायर किये थे लड़का दो भाई और दो बहन था, जिसे हम देखने गए थे वो लड़का सबसे छोटा था। घर के बाहर हमारी गाड़ी रुकी लड़के के पिता जी नमस्कार करते हुए बाहर आएं और हम सभी को घर के अंदर ले गयें ।

मेरी आदत है जहाँ भी जाऊ वहां आस पास देखते रहने की कुछ फोटोजेनिक दिखे तो तुरंत फोटो खींच कर अपने मोबाइल में कैद कर लो तो ऐसे ही मेरी नज़र पड़ी लड़के के घर के बाहर की दीवार पर जिसपे लिखा था

” बेटी एक वरदान दहेज़ दे कर मत करो अपमान, बेटियों को सम्मान दें दहेज़ लेना छोड़ दें ”

दहेज

बस मैंने मोबाइल निकला और फोटो खीँच ली।

हम अंदर गए उनका मकान बन रहा था बैठने की बस एक छोटी सी जगह थी जहाँ हम सब बैठ गए। भैया ने लड़के के पापा से हम सब को मिलवाया फिर बात शुरू हुई हम सब ने बताया की हम लोग क्या करते हैं कहाँ रहते हैं फिर पापा ने उनको मेरे बारे में बताया की मेरे बेटे की शादी है जनवरी में आप आइयेगा। हमने अपने बेटे की शादी बड़े धूम धाम से कर रहे हैं और दहेज़ में कुछ भी नहीं लिया है क्युकी मेरे यहाँ सब कुछ हैं ही और लड़की भी पढ़ी लिखी है तो हमने ये सब नहीं लिया दिया दोनों पक्षों ने मिल जल कर शादी कर ली। तो हम चाहते हैं आपके यहाँ भी रिश्ता हो तो हम लोग ऐसे ही करें ताकि किसी को कोई दिक्कत ना हो।

लड़के के पापा ने कहाँ हाँ बिलकुल ऐसा ही होगा पहले आप टीपन और फोटो भेजवा दीजिये।

इसी बात में चाय आई हमने चाय पी फिर भइया ने लड़के को बुलाने को कहाँ की जरा लड़के से मिल लिया जाएँ। लड़का आया उस से हमने उस की नौकरी की बात की उस की पढाई के बारे में पूछा फिर भइया और पापा लड़के के पापा से बात करने लगे। सब कुछ ठीक रहा और बात यहाँ आ कर रुकी की लड़के वालो को हमारा घर परिवार पसंद आया और उन्होंने कहा की पहले फोटो और टीपन ( जन्मपत्री ) भिजवा दीजिये फिर हम पंडित से दिखा कर आपको खबर करते हैं।

भइया ने फोटो और टीपन भिजवा दिया उनलोगो को पसंद भी आया और लड़के वालो ने हमारे घर बुलावा भेजा की आइये बात की जाए हमे ये रिश्ता पसंद है।

पापा भइया छोटा भाई और मेरा भतीजा ये चारो लोग लड़के वाले के यहाँ बात चीत के लिए गएँ। पापा ने कहाँ बताइये आपको कुछ कहना है या हमे कुछ करना है तो शादी कैसे करेंगे उस पे अब बात हो जाए और हमारा बजट पांच लाख है शादी हमको इसी में करनी है बस इतना कहना था लड़के के पापा ने कहाँ पांच लाख में शादी होती है ? जाइये पहले बैंक पी ओ का रेट पता कर लीजिये फिर आइयेगा यहाँ। अब हम सभी चौंक गए रेट ? रेट काहे का ? हमारी लड़की पढ़ी लिखी है हमने आपको पहले ही बताया था की हमने अपने बेटे की शादी में दहेज़ नहीं लिया है कुछ और दोनों पक्ष मिल कर शादी कर रहे हैं। तब लेक क पापा ने कहा ऐसा कहीं होता है क्या यहाँ पूरा घर बनवाना है शादी में इतना सब खर्चा है पुरे गाओं को खिलाना है वो सब तो आपको करना ही पड़ेगा और लड़का बैंक पी ओ है उठा तो उस का मार्केट वैल्यू भी है।

पापा भाई और सभी जो गए थे वो उठ कर चले आये की वहां शादी नहीं होगी।

और ये पहला अनुभव था जहाँ के बाप दूसरे बाप को कहता है जाओ रेट पता कर की आओ मेरे बेटा बिकाऊ हैं

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