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कुम्भ 2019

 

 

प्रयागराज और कुम्भ में जाति-पाति, वर्गभेद रहित समरस, संयमी, सहिष्णु हिन्दू-समाज का दर्शन। संगम नगरी प्रयागराज में आस्था के सबसे बड़े मेले कुंभ का आगाज हो गया है कुंभ ऐसा महापर्व है, जब देश-विदेश से कई लोग यहां जुटते हैं, जिसमें साधु-श्रद्धालु आदि शामिल रहते हैं। यहां स्नान करते हैं और दान पुण्य कमाते हैं।
कन्नौज का शासन(643 ई.) संभालने के बाद हर्षवर्धन ने संगम तट पर दानोत्सव का आयोजन किया।
छठीं सदी में भारत के दौरे पर आए चीनी यात्री ह्वेनसांग
इसे देखने 18 राजाओं के साथ शामिल हुए थे उन्होंने
भी अपने संस्मरणों में प्रयागराज और कुंभ का वर्णन में सम्राट हर्षवर्धन का जिक्र किया और उनके 75 दिन तक के दान के बारे में बताया कि हर्षवर्धन तबतक दान करते थे जबतक कि उनके पास से सबकुछ खत्म न हो जाए. यहां तक कि वह अपने राजसी वस्त्र भी दान कर देते थे।
तेरह सौ साल पहले राजा हर्षवर्द्धन ने कुंभ मेले में इतना दान दिया कि ह्वेनसांग आश्चर्य में पड़ गया और उसने जिक्र करते हुए लिखा है कि “वो राशि पाँच वर्ष के बजट के बराबर थी ईसलिए इतिहास में उन्हें दान देने की वजह से भी जाना जाता है। कुंभ की भव्यता और गौरव आज से 1375 साल पहले ही थी।
आज जब मॉल में रोज मेला है तब इस कुम्भ रूपी दिव्य सांस्कृतिक विरासत को देखना और भावी पीढ़ी को दिखाना जरूरी है। हमारी सभ्यता संस्कृति अतुल्नीय हैै और हमे गर्व है हम उस सभ्यता संस्कृति का हिस्सा हैं।
हम वह लोग है जो उत्सव के कारण मिलने का बहाना नहीं ढूंढ़ते बल्कि जहां चार लोग मिल जाएं वही उत्सव मना लेते है फिर यह तो कुम्भ हैै जहां करोड़ों लोग पहुंचेंगे।अदने से राक्स्टार के कॉन्सर्ट में 10-15 हज़ार की भीड़ की फोटो डाल ‘The crowd has gone crazy’ स्टेटस डालने वाले इस बार अमावस्या नहान पर कुंभ में जरूर प्रयागराज जायें। जब 1 दिन में 2 करोड़ लोगों को नहाते देखेंगे तो ‘क्राउड’ क्या होता है और अलौकिक दृश किसे कहते हैं समझ आ जाएगा।
हर हर गंगे!!!

 

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